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अगर आप फ्लैवर कॉन्डोम इस्तेमाल करते है तो एक बार उससे होने वाले खतरनाक प्रभाव भी पढ़ ले

  1. 2014 से सेक्स की उम्र 18 से घटकर 14 वर्ष पर पहुंची
  2. भारत में बिना प्रिसक्रिप्शन के कॉन्डोम व गर्भपात गोलियों पर रोक लगनी चाहिए
  3. होमो सेक्सुएलिटी से एचआईवी व रेबुला का खतरा बढ़ता है
  4. बच्चों को सेक्स एजूकेशन के लिए गायनेकोलॉजिस्ट व शिक्षक आगे आए




आगरा। 1960 के आंकड़ों के अनुसार भारत में सेक्स की उम्र 18 वर्ष थीं वहीं अब 2014 में वह घटकर 14 वर्ष रह गई है। जिसके लिए एकल परिवार, इंटरनेट और माता पिता दोनों का कामकाजी होना है। बच्चों के पास अपनी भावनाएं शेयर करने के लिए उनके माता-पिता के पास व्यस्त जीवन शैली के दौर में समय में ही नहीं। आज के दौर में यह स्थित बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है।

        कलाकृति में आयोजित आइकोग में सेक्स एजूकेशन इंन इंडिया नीड ऑफ द आवर, में पैनल डिसकशन में डॉक्टरों ने इस विषय पर विचार मंथन किया। पैनल में मौजूद पिलिपिन्स के डॉ. रोनाल्टो, डॉ. अर्चना चौहान, डॉ. रंजू अग्रवाल आदि शामिल थे। उन्होंने कहा कि सेक्स सम्बंधी आधी अधूरी जानकारी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है। वह इस सम्बंध में माता पिता से बात करने में झिझकते हैं और अपने साथियों से उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में बच्चों को सही दिशा दिखाने का सबसे बड़ा दायित्व गायनेकोलॉजिस्ट व शिक्षकों का है। पैनल डिसकशन में कहा गया कि फ्लेवर कॉन्डम स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यह सिर्फ ओरल सेक्स के लिए बने हैं। वेजाइनल सेक्स करने पर इससे वैक्टीरियल इनफेक्शन हो सकता है। जिसका कारण है इसमें पॉलीसेकराइट्स, सैकरीन, एसपार्टिव प्रयोग किया जाता है। कैसरीन वजाइना को ड्राइ कर देती है, जिससे इनफेक्शन होन का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. मुकेश चंद्रा ने कहा कि भारत में बिना प्रिसक्रिप्शन के कॉन्डोम व गर्भपात गोलियों पर रोक लगनी चाहिए। इनके आसानी से उपलब्ध होने की वजह भी से ही सेक्स की उम्र में कमी आ रही है। कम्पनियों को भी इसके साथ वार्निंग देनी चाहिए। फोग्सी इस विषय पर पॉलीसि बनाने के लिए सरकार से चर्चा कर रही है। पैनल डिसकसन में होमो सेक्सुएलिटी पर चर्चा हुई, जिसमें कहा गया कि इससे एचाईवी व रेबुला जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
         डॉ. रंजू अग्रवाल ने कहा कि स्कूल में एडोलिसेन्ट एजूकेशन के लिए हेल्थ प्रोग्राम चलने चाहिए। भारत में सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ही गर्भनिरोधक का प्रयोग करते हैं। इसके लिए हमें जागरूकता फैलानी होगी। क्योंकि गर्भनिरोधक का प्रयोग की गर्भपात की संख्या मामलों में कमी ला सकता है।

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