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तनाव भी बना सकता है डायबिटिक


आईसीयू में 25 पीसदी रोगियों की शुगर बढ़ जाती है तनाव के कारण

गम्भीर बीमारी का तनाव मरीज को डायबिटिक भी बना सकता है। आईसीयू में पहुंचने वाली 25 फीसदी मरीजों (जिन्हें पहले डायबिटीज नहीं है) में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। चिकित्सा क्षेत्र में पहले माना जाता था कि ऐसे मामलों में मरीज की शुगर कंट्रोल नहीं करनी चाहिए। लेकिन 2009 में नाइस शुगर के नाम से हुए ट्राइल के बाद यह धारणा गलत साबित हुई। जब ऐसे मामलों में मरीजों की शुगर को कंट्रोल किया गया तो उनकी स्थित सुधरने के मामले में बेहतर नतीजे सामने आए।
             आगरा मे पूर्व मे आयोजित क्रिटीकेयर-2016 में अपने लेक्चर के दौरान डॉ. सुनील बंसल ने यह बात रखी। उन्होंने बताया कि आईसीयू में शुगर लेबल बढ़ने पर जिन मरीजों में इसे कंट्रोल किया जाता है, वह ठीक होकर आईसीयू से जल्दी बाहर आ जाते हैं। वेंटीलेचर पर जाने की सम्भावना भी कम हो जाती है। ऑपरेशन के बाद के कॉम्पलीकेशन भी कम हो जाते हैं। जबकि पहले ऐसे मरीजों में शुगर कंट्रोल न करने पर मृत्यु दर बढ़ने के मामले देखे जाने लगे। उन्होंनन बताया कि आईसीयू में डायबिटिक मरीजों को दवा नहीं बल्कि इंसूलिन (आईवी द्वारा) देनी चाहिए। 

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