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रेशम की पहचान के लिए हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम


आगरा : रेशम किसी परिचय का मोहताज नही है। यह एक वेश कीमती धागा है एवं इसे वस्त्रों की रानी कहा जाता है। रेशमी धागों से बनाई गयी साड़ियां, लहंगे, चुन्नी, दुपट्टा, एवं सिले सिलाये वस्त्र पहनने वाले में विशेष दर्जा का संचार करते है। रेशमी परिधान पुरुषों, महिलाओ एवं बच्चो का गौरव बढाते है। केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित भारतीय रेशम मार्क संगठन ने इस समस्या को समाप्त करने के लिए सिल्क मार्क योजना की शुरुआत की है। इसी क्रम मे फेब्रिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में आगरा के ग्लैम प्रोफेशनल्स एकेडमी मे एक विशेष जागरूकता अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया| जिसमे यहाँ के छात्रों एवं शिक्षकों को सिल्क एवं सिल्क मार्क की जानकारी दी गयी। कार्यक्रम मे अतिथि के रूप मे अद्भुत स्टुडियो से फैशन डिजाइनर हिमानी सरन भी मौजूद रही| 

ये अभियान भारतीय सिल्क मार्क संगठन के वाराणसी चैप्टर द्वारा ग्लैम प्रोफेशनल्स एकेडमी के छात्रों के लिए विशेष तौर पर प्रबंध निदेशक शिवानी मिश्रा की अध्यक्षता में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय रेशम बोर्ड, वाराणसी के उप निदेशक रमेश चन्द्र ने पावर पोवाईंट प्रस्तुतीकरण एवं सिल्क मार्क पर डोकुमेंट्री फिल्म द्वारा विस्तार से सिल्क, सिल्क उत्पादन की विधि, जांच आदि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संयोजन आशीष मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में लगभग 50 प्रशिक्षणार्थी के अलाबा संस्थान की फेकल्टीज से सेंडी लारमा, लिपिका चड्डा, रचना वशिष्ठ आदि भी उपस्थित रही। 

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