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सीएम योगी से एक बार फिर उम्मीद लगाए है ताजनगरी, कब पूरी होंगी ये ख्वाहिश


आगरा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाले आगरा में आपका एक बार फिर स्वागत है। कभी मुगलों की राजधानी रहा ये शहर आज भी सुविधाओं के नाम पर सपने देख रहा है।  वो सपने जो पूर्व की सरकारों के बाद आपकी सरकार ने भी दिखाए। सिविल एन्क्लेव, ताज बैराज, गंगाजल मेट्रो योजना पर कवायद तो खूब हुई, लेकिन अब तक ये सभी अधर में ही लटकी हैं।  कीठम में ईको टूरिज्म, पेठे को नई पहचान और यमुना की दशा सुधारने के लिए तो अब तक कोई शुरुआत भी नहीं हो सकी है। ये शहर इन वादों को पूरा करने की आपसे उम्मीद कर रहा है। 

पर्यटन के क्षेत्र में विश्व के मानचित्र पर अलग पहचान रखने वाले ताजमहल के शहर आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का सपना टूटने के बाद सिविल एन्क्लेव योजना को हवा दी गई। खेरिया हवाई अड्डे को ही विस्तार रूप देकर सिविल एन्क्लेव विकसित करने की योजना है। इसके लिए सदर तहसील के अंतर्गत बल्हैरा, अभयपुरा और धनौली में 23.32 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। यह कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो सका है। 

ताजमहल के डेढ़ किमी आगे नगला पैमा में यमुना पर ताज बैराज प्रस्तावित है। पिछले दौरे पर आपने इस प्रस्ताव को हरी झंडी भी दे दी थी। मगर, अब तक इसी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि सर्वे कार्य और वित्तीय गणना का कार्य पूरा हो चुका है। मगर, यह योजना भी अभी तक कागजों में है।  
पिछले लंबे समय से शहर को मेट्रो ट्रेन के सपने दिखाए जा रहे हैं। इसकी डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। शहर के लिए जरूरी यह योजना अभी अधर में ही है। न तो जमीन का चिहंकन हो पाया और न ही डीपीआर को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकी है। आगरा में भी मेट्रो की घोषणा लखनऊ के साथ ही हुई थी, जबकि लखनऊ में मेट्रो दौड़ चुकी है। 

पर्यटन बढ़ाने के लिए कीठम में ईको टूरिज्म बढ़ाने पर जोर दिया गया था। इसके लिए अक्तूबर 2017 में कई अधिकारियों ने यहां का भ्रमण भी किया। मगर, अब तक इस पर कोई कवायद तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि यहां ईको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार आगरा आए मुख्यमंत्री ने ताज कारीडोर स्थल पर पहुंचकर यमुना की दशा देखी थी। इसके बाद उन्होंने इसके सुधार के आदेश दिए थे। यमुना को भी नमामि गंगे योजना के तहत स्वच्छ करने के लिए कहा था। मगर, यह नदी अभी भी नाले का रूप लिए हुए हैं। इसकी दशा सुधारने के संबंध में कोई पहल नहीं की गई है। 

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