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कच्चे-धागो के बांधने से पूरी होती है यहाँ हर मुराद... जाने


आगरा : आगरा से 40 किलोमीटर दूर फ़तेहपुर सीकरी मे शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर लाखो लोग रोजना आते है और यहाँ अपनी मनोकामना को पूर्ण कराने के लिए फरियादी चादर चढ़ाते है| जिनमे बॉलीवुड के कलाकार भी शामिल है अक्सर कैटरीना कैफ, शेखर सुमन, संजय दत्त अपनी फिल्म की सफलता के लिए आते रहते है| यही नहीं यहाँ मुस्लिम धर्म के अलावा दूसरे धर्म के लोग भी इस मस्जिद की खूबसूरती को निहारने आते हैं। बुलंद दरवाजे से होकर शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में प्रवेश करना होता है। ये शेख सलीम की संगमरमर से बनी समाधि है। इसके चारों ओर पत्थर के बहुत बारीक काम की सुंदर जाली लगी है। दूर से देखने पर ये जालीदार सफेद रेशमी परदे की तरह दिखाई देती है। समाधि के ऊपर बहुमूल्‍य सीप, सींग और चंदन की अद्भुत शिल्पकारी की गई है, जो 400 साल से ज्‍यादा प्राचीन होते हुए भी एक दम आधुनिक लगती है। सफेद पत्थरों में खुदी विविध रंगोंवाली फूलपत्तियां उस दौर की नक्‍काशी का शानदार उदाहरण हैं। 

कच्चे-धागो पर है अटूट विश्वास 
File Photo
शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर हजारो लोग अपनी मुराद की लेकर बड़ी आस से आते है और यहाँ दरगाह पर धागा बांध कर अपनी अर्जी लगा कर चले जाते है और जब उनकी मुराद पूरी होती है तो वो धागे को खोलने दुबारा आते है| इस तरह से रोजना लोग यहाँ लोग कच्चे-धागे बांधने और खोलने आते है| फ़तेहपुर सीकरी पर बॉलीवुड मे कई फिल्मों का भी फिल्मांकन हो चुका है जिनमे प्रमुख रूप से परदेश व कच्चे धागे फिल्म है| 

417 साल पुराना है बुलंद दरवाजा
दुनिया का सबसे बड़ा दरवाजा फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा है, जिसे मुगल शहंशाह अकबर ने गुजरात विजय के बाद बनवाया था। शेख सलीम चिश्ती दरगाह परिसर का यह मुख्य दरवाजा है। जो लाल पत्थर से बनाया गया है। 54 मीटर ऊंचे इस दरवाजे तक पहुंचने के लिए 42 सीढ़ियां हैं। फतेहपुर सीकरी में पहाड़ी पर बनाया गया बुलंद दरवाजा कई किमी दूर से ही नजर आता है और सीकरी की पहचान है। वहीं, महल परिसर में दीवान ए आम, दीवान ए खास में भी संरक्षण की दरकार है। कभी लंदन से बड़ा और व्यवस्थित शहर रहे फतेहपुर सीकरी की शान है बुलंद दरवाजा। 


ये है बुलंद दरवाजा का इतिहास 
मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नाम की जगह पर ही हराया था। आगरा से 40 किलोमीटर दूर यही स्‍थान वर्तमान में फतेहपुर सीकरी कहलाता है। बाद में मुगल सम्राट अकबर ने इसे राजधानी बनाने लिए यहां किला बनवाया, लेकिन पानी की कमी के कारण राजधानी को आगरा में स्थानांतरित करना पडा़। अकबर एक सफल राजा होने के साथ-साथ कलाप्रेमी भी था। फतेहपुर सीकरी 1570-1585 तक मुगल साम्राज्‍य की राजधानी रहा। दरसल अकबर नि:संतान था और संतान प्राप्ति के सभी उपाय असफल होने पर उसने सूफी संत शेख सलीम चिश्‍ती से प्रार्थना की,जिसके बाद उसे बेटा मिला। इस बात से खुश और उत्‍साहित होकर अकबर ने यहां अपनी राजधानी बनाने का निश्‍चय किया था। हालांकि इस स्‍थान पर पानी की बहुत कमी थी इसलिए केवल 15 साल बाद ही राजधानी को वापस आगरा ले जाना पड़ा।