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कविता : बहुत मासूम है मेरे आँसू....


बहुत मासूम है मेरे आँसू ,
सुनो ये राज कहती हूं।

ये गिरते ही है,उनके लिए है, 
जिन्हें इनकी परवाह नही होती।

बहुत चोट खाकर हम सख्त हुए हैं यारो,
मेरी बहादुरी की
यूँ ही तारीफ नही होती ।

खुश रहने की बजह हम  
ढूंढ ही लेते हैं जमाने मे,

मगर ये ना समझना कि 
तन्हां कभी मेरी रुह नही रोती,
आपका साथ मिला 
जीने की फकत इतनी बजह काफी है

ज़िन्दगी का सफर अभी  बाकी  है ये जानती हूं 
मुझमे होंसले ओर हिम्मत अभी बाकी हैं।

हारना कभी सीखा नही मैने
और जीतने की ज़िद अभी बाकी हैं|

✍ राजश्री 'राज'
आगरा, उ0 प्र0

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